Internet Ka Avishkar Kisne Kiya (इंटरनेट का आविष्कार किसने किया)

Internet Ka Avishkar Kisne Kiya: आप भी Internet का काफी उपयोग करते होंगे, लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि आखिर ये Internet कैसे बना, कब बना, किसने बनाया और क्यों बनाया। कभी ना कभी आपके मन में ऐसे सवाल जरूर आते होंगे। आइए हम आपको इंटरनेट का आविष्कार किसने किया (Internet ka Avishkar Kisne Kiya) से जुडी सारे सवालों का जवाब इस पोस्ट में बताते हैं।

Internet Ka Avishkar Kisne Kiya

इंटरनेट का आविष्कार किसने किया (Who invented the Internet in Hindi): Internet एक ऐसा शब्द जिसके बिना अब शायद जीना भी मुश्किल हो सकता है। क्या आपने कभी सोचा है कि आजकल के जमाने में अगर एक दिन, एक घंटे या सिर्फ एक मिनट के लिए भी Internet बंद हो जाए तो क्या होगा ?

Internet के सिर्फ एक मिनट भी बंद हो जाने से पूरी World में लाखों-करोंड़ों रुपयों का नुकसान होगा, इसके साथ-साथ कई तरह की बर्बादी का नजारा भी देखना पड़ सकता है।

ऐसे में अब बिना Internet के जीना भी मुश्किल हो गया है। एक आम आदमी भी अपनी आम जिंदगी को सिर्फ Internet के सहारे थोड़ी खास बना लेता है। उस साधारण व्यक्ति की Life थोड़ी सुविधाजनक हो जाती है।

इंटरनेट का आविष्कार किसने किया – Internet Ka Avishkar Kisne Kiya

इंटरनेट Information Technology की सबसे आधुनिक प्रणाली है। इंटरनेट को आप विभिन्न Computer Networks का एक विश्व स्तरीय समूह (Network) कह सकते है। इस नेटवर्क में हजारों और लाखो Computer एक दुसरे से जुड़े है। साधारणत: कंप्यूटर को टेलीफोन लाइन द्वारा इंटरनेट से कनेक्ट किया जाता है। लेकिन इसके अतिरिक्त बहुत से साधन है जिससे कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ा जा सकता है।

बात यदि इंटरनेट के विकास की करे तो, इंटरनेट को विकसित करने में किसी एक व्यक्ति का हाथ नहीं हैं। इंटरनेट को आज हम सब जानते हैं और उसका इस्तेमाल करते हैं। नीचे विभिन्न लोगों की सूची दी गई है, जिन्होंने Internet में योगदान और विकास करने में मदद की है।

विचार

31 मई, 1961 को “Information Flow in Large Communication Nets” नामक अपना पहला पेपर प्रकाशित करने के बाद Internet के शुरुआती विचार का श्रेय लियोनार्ड क्लेरॉक को दिया जाता है।

1962 में, जे.सी.आर. लिक्लिडर IPTO के पहले डायरेक्टर बने और उन्होंने galactic network के बारे में अपना दृष्टिकोण दिया। इसके अलावा, Licklider और Kleinrock के विचारों के साथ, रॉबर्ट टेलर ने नेटवर्क के विचार को बनाने में मदद की जो बाद में ARPANET बन गया।

प्रारंभिक रचना

जैसा कि आज हम जानते हैं कि Internet का विकास सबसे पहले 1960 के दशक में अमेरिका के कैलिफोर्निया में शुरू हुआ था।

1968 की गर्मियों में, नेटवर्क वर्किंग ग्रुप (NWG) ने स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट (SRI) में एल्मर शपीरो (Elmer Shapiro) की अध्यक्षता में अपनी पहली मीटिंग आयोजित की। अन्य उपस्थित लोगों में स्टीव कारर, स्टीव क्रोकर, जेफ रुलिफ़सन और रॉन स्टफटन शामिल थे। मीटिंग में, समूह ने मेजबानों को एक दूसरे के साथ बातचीत करने के लिए मुद्दों को सुलझाने पर चर्चा की।

दिसंबर 1968 में, SRI के साथ एल्मर शापिरो (Elmer Shapiro) ने एक रिपोर्ट “A Study of Computer Network Design Parameters” जारी की। इसके आधार पर पॉल बारन, थॉमस मारिल और अन्य द्वारा पहले किए गए काम के आधार पर, लॉरेंस रॉबर्ट्स और बैरी वेसलर ने इंटरफेस मैसेज प्रोसेसर (IMP) स्पेसिफिकेशन का निर्माण किया। बोल्ट बेरेनेक और न्यूमैन, इंक (BBN) को बाद में IMP सब नेटवर्क के डिजाइन और निर्माण के लिए एग्रीमेंट से सम्मानित किया गया।

आम जनता इंटरनेट से कब परिचित हुआ

UCLA (कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स) ने 3 जुलाई, 1969 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जनता को Internet से परिचित कराया।

पहला नेटवर्क डिवाइस

29 अगस्त, 1969 को पहला नेटवर्क स्विच और “IMP” (इंटरफेस मैसेज प्रोसेसर) नामक Network Device का पहला टुकड़ा UCLA को भेजा गया। 2 सितंबर, 1969 को, पहला डेटा UCLA होस्ट से स्विच में चला गया।

पहला संदेश और नेटवर्क क्रैश

शुक्रवार, 29 अक्टूबर, 1969 को 10:30 बजे, पहला इंटरनेट संदेश UCLA में कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर लियोनार्ड क्लेरॉक की प्रयोगशाला से SRI में एक कंप्यूटर पर भेजा गया था। कनेक्शन ने न केवल पहले प्रसारण को सक्षम बनाया, बल्कि इसे पहला इंटरनेट बैकबोन भी माना जाता है।

वितरित किया जाने वाला पहला संदेश LO था, जो UCLA से SRI कंप्यूटर में लॉग करने के लिए चार्ली एस क्लाइन द्वारा LOGIN का एक प्रयास था। हालाँकि, संदेश पूरा नहीं हो सका, क्योंकि SRI सिस्टम क्रैश हो गया। क्रैश के तुरंत बाद, समस्या हल हो गई थी, और वह कंप्यूटर में लॉग इन करने में सक्षम था।

ई-मेल का विकास किया

रे टॉमलिंसन (Ray Tomlinson) ने 1971 में पहला नेटवर्क ई-मेल भेजा। यह अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए एक नेटवर्क पर संदेश भेजने के लिए पहला मैसेज सिस्टम है।

टीसीपी विकसित किया गया

विंटन सेर्फ़ और रॉबर्ट काह्न (Vinton Cerf and Robert Kahn) ने 1973 के दौरान TCP डिज़ाइन किया जो दिसंबर 1974 में प्रकाशित हुआ था। अधिकांश लोग इन दो लोगों को इंटरनेट के आविष्कारक मानते हैं।

पहला कमर्शियल नेटवर्क

ARPANET का एक व्यावसायिक वर्जन, जिसे टेलनेट के रूप में जाना जाता है, 1974 में पेश किया गया और इसे पहला Internet Service Provider (ISP) माना जाता है।

ईथरनेट की कल्पना की गई

बॉब मेटकाफ (Bob Metcalfe) ने 1973 में ईथरनेट के विचार को विकसित किया।

मॉडेम पेश किया गया

डेनिस हेस और डेल हीथरिंगटन (Dennis Hayes and Dale Heatherington) ने 1977 में 80-103A मॉडेम जारी किया। मॉडेम और उनके बाद के मॉडेम, होम यूजर्स के लिए इंटरनेट से कनेक्ट करने और ऑनलाइन होने के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बन गया हैं।

टीसीपी / आईपी बनाया गया

1978 में, टीसीपी ने TCP/IP में विभाजन किया, जो Real Time traffic का समर्थन करने के लिए डैनी कोहेन, डेविड रीड और जॉन शॉच द्वारा संचालित था। टीसीपी / आईपी सहायता का निर्माण UDP बनाता है और बाद में इसे 1 जनवरी, 1983 को ARPANET में मानकीकृत किया गया। आज भी, TCP/IP इंटरनेट पर उपयोग किया जाने वाला प्राथमिक प्रोटोकॉल है।

DNS पेश किया

पॉल मॉकपेट्री और जॉन पोस्टेल ने 1984 में DNS को इंट्रोड्यूस किया, जो Domain Name Syetm का भी परिचय देता है। पहला इंटरनेट डोमेन नाम, symbolics.com, 15 मार्च 1985 को मैसाचुसेट्स (Massachusetts) कंप्यूटर कंपनी सिम्बॉलिक्स द्वारा रजिस्टर्ड है।

First commercial dial-up ISP

अमेरिका में पहला वाणिज्यिक Internet Service Provider (ISP), जिसे “द वर्ल्ड” के रूप में जाना जाता है, को 1989 में पेश किया गया था। यह विश्व का पहला ISP था, जिसे अब हम इंटरनेट के रूप में उपयोग करते हैं।

HTML

1990 में, CERN में काम करने के दौरान, टिम बर्नर्स-ली ने HTML विकसित किया, जिसने आज Internet को नेविगेट करने और कैसे देखा जाए, इसमें बहुत बड़ा योगदान दिया। पहली वेबसाइट, info.cern.ch टिम बर्नर्स-ली द्वारा सर्न में विकसित की गई है और 6 अगस्त 1991 को ऑनलाइन प्रकाशित हुई।

WWW

टिम बर्नर्स-ली ने 6 अगस्त, 1991 को WWW को जनता के सामने पेश किया और 23 अगस्त 1991 को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो गया। वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) जिसे आज ज्यादातर लोग “Internet” या साइटों और पेजों की एक श्रृंखला मानते हैं, लिंक के साथ जुड़े हुए हैं। इंटरनेट को विकसित करने में सैकड़ों लोगों ने मदद की हैं लेकिन WWW के बिना, इंटरनेट उतना लोकप्रिय नहीं होता जितना कि आज है।

पहला ग्राफिकल इंटरनेट ब्राउजर

मोज़ेक पहला व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला ग्राफ़िकल वर्ल्ड वाइड वेब ब्राउज़र है, जिसे NCSA ने मार्क आंद्रेसेन और एरिक बीना (Marc Andreessen and Eric Bina) की मदद से 22 अप्रैल 1993 को रिलीज़ किया था। मोज़ेक का एक बड़ा प्रतियोगी नेटस्केप था, जिसे एक साल बाद जारी किया गया था। आज हम जिन Internet Browsers का उपयोग करते हैं (जैसे, इंटरनेट एक्सप्लोरर, क्रोम, फ़ायरफ़ॉक्स, आदि), मोज़ेक ब्राउज़र से उनकी प्रेरणा मिली।

जावा और जावास्क्रिप्ट

मूल रूप से इसे Oak के रूप में जाना जाता है, जावा एक प्रोग्रामिंग भाषा हैं जिसे जेम्स गोसलिंग द्वारा विकसित किया गया और 1995 में सन माइक्रोसिस्टम्स द्वारा विकसित किया गया। आज भी, जावा का उपयोग Internet Application और अन्य Software Program बनाने के लिए किया जाता है।

जावास्क्रिप्ट 1995 में ब्रेंडन ईच (Brendan Eich) द्वारा विकसित किया गया था और मूल रूप से लाइवस्क्रिप्ट के रूप में जाना जाता था। लाइवस्क्रिप्ट को नेटस्केप नेविगेटर 2.0 के साथ जारी किया गया और इसका नाम बदलकर जावास्क्रिप्ट के साथ नेटस्केप नेविगेटर 2.0 B3 कर दिया गया। जावास्क्रिप्ट एक इंटरप्रेटेड क्लाइंट-साइड स्क्रिप्टिंग भाषा है जो एक वेब डिजाइनर को अपने वेब पेज में कोड डालने की क्षमता देता है।

अन्य पढ़ें:

इंटरनेट के आविष्कार को समझें : कब बना, क्यों बना, कैसे बना, किसने बनाया

सोवियत संघ ने पहला मानव निर्मित उपग्रह लॉन्च किया

Internet की कहानी बड़ी मजेदार है। इसकी शुरुआत एक लड़ाई की वजह से हुई थी। 4 अक्टूबर 1957 को पृथ्वी पर एक अद्भूत घटना घटी जिसने पूरी दुनिया को बदलने की एक राह दिखा दी।

इस दिन सोवियत संघ ने दुनिया का पहला मानव निर्मित यानि इंसानों द्वारा बनाया गया सैटेलाइट लॉन्च किया गया था। दुनिया के पहले सैटेलाइट का नाम Sputnik था। ये खबर काफी तेजी से पूरी दुनिया में फैल गई।

अमेरिका को इस खबर से काफी हैरानी हुई, क्योंकि अमेरिका भी काफी वक्त से दुनिया का पहला मानव निर्मित सैटेलाइट बनाने में लगा हुआ था। लेकिन सोवियत संघ ने उससे पहले ये कर दिखाया। इस वजह से दोनों देशों के बीच थोड़ी नोक-झोंक शुरू हुई और इन दोनों देशों के बीच एक COLD WAR शुरू हो गई।

अमेरिका ने बनाया ARPA

1957 में अमेरिका के राष्ट्रपति Dwight D. Eisenhower थे। उन्होंने सोवियत संघ के साथ हुई नोक-झोंक के बाद 1958 में एक एजेंसी का निर्माण किया, जिसका नाम Advanced Research Projects Agency (ARPA) था। इस एजेंसी का निर्माण देश की तकनीकी ताकत को काफी ज्यादा और तेजी से बढ़ाने के लिए बनाया गया था।

इस एजेंसी के नाम में काफी बदलाव हुए, 1972 में इसका नाम DARPA यानि Defense Advanced Research Projects Agency हो गया। इसके बाद 1993 में इसका नाम बदलकर वापस ARPA रखा गया और फिर 1996 में इसका नाम बदलकर DARPA रखा गया। इस एजेंसी की शुरुआत करने के पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति का मकसद अपने देश में सांइस एंड टेकनोलॉजी को दूसरे देशों की तुलना में आगे बढ़ाना था।

इंटरनेट जैसी किसी चीज को बनाने की शुरुआत इसी झगड़े के साथ हुई थी। आपको बता दें कि उस वक्त कंप्यूटर का साइज काफी बड़ा होता था। उस वक्त कंप्यूटर को रखने के लिए एक बड़े कमरे की जरूरत होती थी। हम अगर आसान भाषा में बात करें तो उस वक्त के Computer में मैगनेटिक टेप का इस्तेमाल किया जाता था। उस वक्त मल्टीपल कंप्यूटर यानि एक से ज्यादा Computer को किसी एक नेटवर्क से जोड़ने का कोई भी जरिया नहीं था।

उन दिनों ARPA तेजी से अपने विज्ञान को विकास कर रही थी, लेकिन मल्टीपल कंप्यूटर के एक साथ काम ना कर पाने की समस्या उनके काम में बाधा डाल रही थी। इस वजह से ARPA ने सोचा कि क्यों ना कुछ ऐसा बनाया जाए जिसके जरिए बहुत सारे Computer को एक साथ एक नेटवर्क पर चलाया जा सके।

ARPA ने उस वक्त एक ऐसी Networking Technology बनाने के लिए एक टेकनिकल कंपनी की मदद ली। उस कंपनी का नाम BBN Technologies था। इन दोनों का मकसद चार अलग-अलग ओपरेटिंग सिस्टम वाले चार अलग-अलग कंप्यूटर को एक साथ एक सिंगल नेटवर्क के जरिए कनेक्ट करना था। इस नेटवर्क का नाम APRANET दिया गया।

ARPANET दुनिया का पहला ऐसा इंटरनेट कनेक्शन बन गया, जिसमें TCP/IP प्रोटोकॉल यानि इंटरनेट रूल को लागू किया गया। आपको बता दें कि यहां TCP का मतलब Transmission Control Protocol और IP का मतलब इंटरनेट प्रोटोकॉल है। आपने IP Address के बारे में तो जरूर सुना होगा। इसका मतलब यहीं होता है कि इंटरनेट प्रोटोकॉल का एड्रैस क्या है।

ARPANET+PRNET+SETNET = INTER-NETWORKING

आज दुनियाभर में इंटरनेट का आना और फैलना ARPA की हीं देन है। इसके बाद लगातार इस Network System को बेहतर बनाने का काम चलता रहा। 1973 में इंजीनियर्स और वैज्ञानिकों ने सोचा कि क्योंकि ARPANET को PACKET RADIO से जोड़ दिया जाए। पैकेट रेडियो एक डिजिटल रेडियो संचार मोड है जिसका उपयोग डेटा के पैकेट भेजने के लिए किया जाता है। पैकेट रेडियो, डेटाग्राम प्रसारित करने के लिए पैकेट स्विचिंग का उपयोग करता है। पैकेट रेडियो का उपयोग डेटा लंबी दूरी तक संचारित करने के लिए किया जा सकता है।

पैकेट रेडियो को अगर आसान भाषा में समझाए तो इसका इस्तेमाल दो Computer को कनेक्ट करने के लिए Radio Transmitter और Reciever का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से दो कंप्यूटर को जोड़ने के लिए किसी फोन लाइन या किसी वायर की जरूरत नहीं होती थी। ARPANET और PRNET को जोड़ने के लिए तीन साल तक लगातार काम चला और फिर इंजीनियर दो कंप्यूटर को एक नेटवर्क के जरिए कनेक्ट कर पाए।

इसके एक साल के बाद इन दोनों नेटवर्क के SETNET यानि कि सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट किया गया, जो कि पूरी दुनिया को जोड़ने के लिए काफी जरूरी था। इस तरह से उस वक्त दुनियाभर के बहुत सारे नेटवर्क को एक साथ जोड़ा गया था। इस वजह से इसका नाम INTER-NETWORKING रखा गया। इसी INTER-NETWORKING को आज के जमाने में शॉर्ट फॉर्म देकर लोग Internet कहने लगे हैं।

इस नेटवर्क के आते ही पुरी दुनिया के बहुत सारे नेटवर्क इससे कनेक्ट होने लगे। इसके बाद 1989 में एक इंग्लिश वैज्ञानिक Tim Berners-Lee ने एक नया सिस्टम तैयार किया जिसके जरिए दुनिया का हर इंसान कहीं से भी किसी भी चीज की जानकारी इंटरनेट पर एक URL के जरिए ढूंढ सकता है। इस सिस्टम को WORLD WIDE WEB यानि WWW का नाम दिया गया।

www की सफलता के बाद इसमें लगातार विस्तार किए गए और आज के जमाने में हमारे पास इंटरनेट का एक विस्तार रूप मौजूद है। आज कंप्यूटर के साथ-साथ Phone, Smart Phone, Smart TV, Smart Watch, Tab, Camera जैसी बहुत सारी चीजों से भी इंटरनेट को जोड़ दिया गया है। इसी तरह से आने वाले कुछ सालों के बाद हमारे आसपास की लगभग हर चीज Internet से जुड़ जाएगी और हमारी जिंदगी काफी आसान हो जाएगी।

Sanjeev Kumar is the Author & Founder of the HindiSites.com. He has also completed his graduation in Computer Engineering from Patna (Bihar) . He is passionate about Blogging & Digital Marketing.

Leave a Comment